Friday, April 19, 2024

Moong ki kheti: प्रति बीघा 8 क्विंटल तक पैदावार होगी,इस प्रकार से करे मूंग की खेती, जाने पूरी जानकरी

प्रति बीघा 8 क्विंटल तक पैदावार होगी,इस प्रकार से करे मूंग की खेती, जाने पूरी जानकरी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में ज़ायद की फसलों का रकबा तीसरी फसल के रूप में बढ़ रहा है. ज़ायद में मुख्य रूप से मूंग, मूंगफली, मक्का, उड़द और धान की खेती की जाती है. इनमें से किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक फसल मूंग है, जिसे राज्य के किसानों ने ज़ायद में अधिकतम क्षेत्रों में अपनाया है। मूंग की फसल को कैश क्रॉप के नाम से जाना जाता है. इसकी बुवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में भी की जा सकती है. अगर आप भी गर्मियों में मूंग की खेती कर रहे हैं, तो यह लेख सिर्फ आपके लिए ही है. हम आपको बताएंगे कि किसानों को मूंग की खेती से बंपर पैदावार लेने के लिए क्या करना होगा. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

उन्नत किस्मों का चयन (Unnat Kismon ka Chayan)

मूंग की बुवाई के लिए किसानों को सबसे अच्छे बीज का चुनाव करना चाहिए. मूंग की उन्नत किस्मों में जावर मूंग-721, टॉम्बे जावर मूंग-3, के – 851, पूसा विशाल, पीडीएम – 11, एच.यू.एम. 1 (हम्ह-1) आदि शामिल हैं. किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उन्नत किस्मों का चुनाव कर सकते हैं.

बीज की मात्रा और बीज उपचार (Beej ki Matra aur Beej Upchar)

गहरी, जल निकास वाली दोमट या हल्की मिट्टी मूंग के लिए ज्यादा उपयुक्त होती है. मिट्टी क्षारीय नहीं होनी चाहिए. ज़ायद में मूंग की खेती के लिए बीज की मात्रा 20-25 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए. प्रति किलो बीज पर 3 ग्राम थिरम फफूंदनाशक से बीज उपचार करने से फसल को बीज जनित और मृदा जनित रोगों से बचाया जा सकता है. साथ ही एक लीटर पानी में 250 ग्राम गुड़ के साथ 600 ग्राम राइजोबियम कल्चर को गर्म कर लें. ठंडा होने के बाद बीजों को उपचारित कर छाया में सुखाकर बुवाई कर दें. इससे नाइट्रोजन स्थिरीकरण अच्छा होता है.

गर्मियों में मूंग की खेती में खाद और उर्वरक (Garmiyon mein Moong ki Kheti mein Khad aur Urvarak)

खाद और उर्वरक डालने से पहले मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिए, फिर भी कम से कम 5 से 10 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट जरूर डालना चाहिए. इसके अलावा, मूंग की फसल को 20 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस, 20 किलो पोटाश, 25 किलो सल्फर और 5 किलो जिंक प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है.

सिंचाई प्रबंधन (Sinchai Prabandhan)

वसंत और गर्मियों में मूंग की खेती को 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है. फसल पकने के 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए. बरसात के मौसम में जब ज्यादा बारिश हो जाए या खेत में पानी भर जाए, तो खेत से अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए, ताकि मिट्टी में हवा का संचार बना रहे.

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